‘स्वच्छ मंडी-शुभ मंडी’ अभियान के तहत सफाई और सुविधाओं में सुधार, 20 मानकों पर हो रही ई-रेटिंग

लखनऊ। प्रदेश की 251 कृषि मंडियों में स्वच्छता और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चलाए जा रहे ‘स्वच्छ मंडी-शुभ मंडी’ अभियान के तहत अब तीन दिवसीय दीपोत्सव मनाया जाएगा। छह से आठ नवंबर तक मंडी परिसर दीपों से जगमगाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संचालित इस अभियान के तहत मंडियों में सफाई, प्रकाश व्यवस्था और किसानों के लिए जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के अनुसार, 24 सितंबर से शुरू हुए अभियान के तहत मंडियों के प्रवेश और निकास द्वारों, कार्यालयों तथा चहारदीवारी की रंगाई-पुताई कराई गई। नीलामी चबूतरों की सफाई और मरम्मत के साथ आंतरिक सड़कों, नालियों और संपर्क मार्गों को दुरुस्त किया गया। झाड़ियों की कटाई और अतिक्रमण हटाने के साथ हाईमास्ट व अन्य प्रकाश उपकरणों की मरम्मत भी कराई गई। किसान विश्राम गृहों, पेयजल और शौचालयों की व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए गए हैं।
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि दीपोत्सव का उद्देश्य मंडियों में स्वच्छता और समृद्धि का संदेश देना है। इससे किसानों और व्यापारियों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा।

ऑनलाइन निगरानी से परखी जा रही सफाई
मंडियों में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। इस पर प्रतिदिन की सफाई, कचरा निस्तारण, सफाई कर्मियों, उपकरणों और खर्च का ब्योरा दर्ज किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी 20 निर्धारित मानकों पर मंडियों की ई-रेटिंग कर रहे हैं। जीपीएस युक्त तस्वीरों के जरिए काम की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी भी की जा रही है।
अभियान के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाली मंडी समितियों को पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम स्थान पर रहने वाली समिति को दो लाख, दूसरे स्थान पर एक लाख और तीसरे स्थान पर रहने वाली समिति को 50 हजार रुपये मिलेंगे। सफाई, कचरा निस्तारण, नालियों की स्थिति और सार्वजनिक सुविधाओं के आधार पर प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
मंडी परिषद के मुताबिक, प्रदेशव्यापी अभियान में 12,389 सफाई कर्मियों ने भागीदारी की। विशेष सफाई कार्यों में 1,446 से अधिक ट्रैक्टर और 6,527 से अधिक उपकरण लगाए गए। परिषद का लक्ष्य स्वच्छता को मंडियों की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना और किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है।