लखनऊ। भारतीय पुलिस सेवा 2023-24 (आरआर-77) बैच के प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों ने शनिवार को उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस), सरोजनीनगर का दौरा किया। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने संस्थान की डीएनए लैब और ड्रोन लैब का निरीक्षण कर फॉरेंसिक तकनीकों और उनके वैज्ञानिक उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए पुलिस सेवा के कठिन दायित्वों और त्याग-समर्पण से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी हर समय मानसिक रूप से तैयार रहकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हैं।

डॉ. गोस्वामी ने आगे बताया कि यूपीएसआईएफएस, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है और इसे विश्वस्तरीय फॉरेंसिक सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में सत्य, न्याय और साक्ष्य के महत्व पर जोर दिया और बताया कि फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से वैज्ञानिक प्रमाणों को अदालत में प्रस्तुत कर केसों को मजबूती दी जा सकती है।
कार्यक्रम में संस्थान के अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने प्रशिक्षुओं का स्वागत किया और यूपीएसआईएफएस की कार्यप्रणाली तथा उपलब्धियों का संक्षिप्त परिचय दिया। इस दौरान संस्थान के शैक्षणिक संकाय और अधिकारी, जिनमें अपर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव, चिरंजिब मुखर्जी, अतुल यादव, सहायक रजिस्ट्रार विवेक कुमार, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. सपना शर्मा, और जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी शामिल थे, उपस्थित रहे।
