लखनऊ। प्रदेश सरकार ने रबी सीजन 2025-26 के लिए अनुदानित बीजों की खरीद की तारीख को बढ़ाकर 10 दिसंबर कर दिया है। पहले यह तिथि 30 नवंबर थी। मौसम के बदलाव और खरीफ फसलों की कटाई में हुई देरी के कारण यह निर्णय लिया गया है ताकि सभी किसान समय पर बीज खरीद सकें और बुवाई में परेशानी न हो।
इस अवसर पर कृषि मंत्री की अध्यक्षता में बुंदेलखंड में प्राकृतिक व जैविक खेती योजनाओं की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में किसानों के लिए उर्वरक उपलब्धता, जैविक उत्पादों के विपणन और प्रमाणीकरण पर चर्चा हुई। मंत्री ने प्रदेश के प्राकृतिक और जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए राज्य स्तरीय ब्रांड बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि बुंदेलखंड में 1073 क्लस्टरों में 42,250 हेक्टेयर में प्राकृतिक और जैविक खेती सफलतापूर्वक चल रही है, जिससे 65,790 किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। योजना के लिए स्वीकृत 105.22 करोड़ रुपये में से अब तक 77.63 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मंत्री ने 470 चैम्पियन फार्मर और 996 कृषि सखी/सीआरपी द्वारा किए गए कार्यों का अनिवार्य सत्यापन कराए जाने के निर्देश दिए।

जैविक उत्पादों के लिए प्रत्येक जनपद मुख्यालय में बिक्री के लिए स्थान चिन्हित किया जाए और उत्पादों को e-NAM प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जा सके। मंत्री ने फसलों में हानिकारक तत्वों की जांच के लिए मेरठ, वाराणसी, अयोध्या, लखनऊ, झांसी और बांदा में लैब टेस्ट कराए जाने के निर्देश दिए।
विश्व मृदा दिवस 5 दिसंबर, 2025 को राज्य स्तर पर वृहद् कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें मृदा परीक्षण के परिणामों का विश्लेषण और जैविक खेती के क्लस्टर के किसानों व चैम्पियन फार्मरों की भागीदारी होगी। मंत्री ने जैविक/प्राकृतिक खेती में अब तक किए गए कार्यों का प्रभाव मूल्यांकन कराने के भी निर्देश दिए।
बैठक में गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि गोबर और गोमूत्र से जीवामृत/घनजीवामृत/प्रॉम तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराया जाए, जिससे रासायनिक उर्वरक का उपयोग कम होगा। मंत्री ने योजना के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों को प्रमाणीकरण के माध्यम से उचित मूल्य और FPO के माध्यम से रिटेल स्टोर खोलने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में श्याम बिहारी गुप्ता (अध्यक्ष, गौ-सेवा आयोग), रविंद्र (प्रमुख सचिव, कृषि), इन्द्रविक्रम सिंह (सचिव, कृषि), टी०के० शिबू (विशेष सचिव, कृषि), डॉ० पंकज त्रिपाठी (कृषि निदेशक), हरेन्द्र उपाध्याय (निदेशक, सीमा), टी०पी० चौधरी (निदेशक, यूपीसोका), डॉ० रमेश कुमार मौर्य (अपर निदेशक), योगेश्वर सिंह (प्राध्यापक, रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी), नरेन्द्र सिंह (सहायक निदेशक, बांदा कृषि विश्वविद्यालय), अनिल कुमार यादव (संयुक्त कृषि निदेशक) शामिल रहें।