लखनऊ। उद्यान विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में गोरखपुर–बस्ती मंडल की मंडलीय औद्यानिक उन्नयन गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में उद्यान, कृषि विपणन, विदेश व्यापार और कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह मुख्य अतिथि रहे।
उन्होनें विभाग की कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। साथ ही उद्यानिक खेती में बेहतर योगदान देने वाले किसानों और कृषि उद्यमियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए। गोष्ठी के दौरान ही प्रदेश में रूफटॉप गार्डेनिंग योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में मंडल के उद्यान विभाग द्वारा उद्यानिक फसलों, तकनीकों और उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे मंत्री ने देखा और अधिकारियों की सराहना की।

औद्यानिक क्रांति की ओर बढ़ रहा प्रदेश : मंत्री
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उद्यान विभाग के 50 वर्ष पूरे होना प्रदेश की एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि 2022 से पहले प्रदेश में हर साल केवल 74 लाख पौधे ही किसानों को मिलते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 29 करोड़ पौधे प्रति वर्ष हो गई है।
उन्होंने बताया कि 1 एकड़ के पॉलीहाउस (लागत 27 लाख) पर सरकार द्वारा 13.5 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है।खेतों को आवारा गोवंश से बचाने के लिए 1.5 लाख रुपये तक की मदद उपलब्ध है।उद्यानिक खेती से प्रति एकड़ 15 लाख रुपये तक की आय संभव है, इसलिए युवाओं को इसमें आगे आना चाहिए। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उद्यान विभाग तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रदेश औद्यानिक क्रांति की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुका है।

एक ब्लॉक–एक फसल से बदलेगी तस्वीर
विभाग द्वारा ‘पर ब्लॉक वन क्रॉप’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ब्लॉक में एक प्रमुख फसल चिन्हित कर उसके उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल का चयन स्थानीय भूगोल और परिस्थितियों के आधार पर ही किया जाए।उन्होंने कहा कि सरकार माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा दे रही है और किसानों को इसके लिए अनुदान भी उपलब्ध करा रही है।
निर्यात और प्रसंस्करण पर विशेष फोकस
उद्यानिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के लिए हॉर्टिकल्चर एक्सपोर्ट प्रमोशन बोर्ड कार्य कर रहा है।प्रदेश के कई जनपदों में फूलों, फलों और शहद के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को मधुमक्खी पालन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया और कहा कि यह कम लागत में अतिरिक्त आय का बेहतर साधन है।
