मोहनलालगंज से आशीष कुमार तिवारी की रिपोर्ट ।
लखनऊ। दखिना गांव में किसान शिव प्रकाश उर्फ कबीर की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कई दिनों से फरार चल रहा आरोपी दिलीप रावत आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। इससे पहले मुख्य साजिशकर्ता प्रॉपर्टी डीलर सुजीत श्रीवास्तव समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
15 नवंबर से गायब था किसान कबीर
कबीर 15 नवंबर को अचानक लापता हो गया था। उसके मित्र सुरेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की। मोबाइल लोकेशन की ट्रैकिंग से पता चला कि 16 नवंबर को कबीर का फोन संदिग्ध नंबरों के साथ उन्नाव के पाटन गांव (थाना बीघापुर) क्षेत्र में सक्रिय था।इसी दौरान बीघापुर पुलिस को एक अधजला शव मिला। फोटो के आधार पर पहचान की गई तो शव कबीर का निकला।
8 दिसंबर को पांच आरोपी पहले ही थे गिरफ्तार
हत्या की पुष्टि के बाद निगोहां पुलिस ने टीम बनाकर जांच तेज की।8 दिसंबर को पांच आरोपी सुजीत श्रीवास्तव, पिंटू रावत, विनोद लालू उर्फ नीरज कश्यप, राजू उर्फ राजकुमार को गिरफ्तार कर दो स्विफ्ट डिज़ायर कारों सहित जेल भेज दिया गया था।
छठे आरोपी दिलीप रावत की गिरफ्तारी
एसओ निगोहां अनुज कुमार तिवारी ने बताया कि शुक्रवार को नगराम क्षेत्र के ब्राह्मणटोला निवासी दिलीप रावत को देवीखेड़ा पुलिया के पास से दबोचा गया।
दिलीप ने कबीर को झांसे से बुलाया था
पुलिस पूछताछ में दिलीप ने कबूल किया कि 15 नवंबर की शाम उसने ही कबीर को लालपुर टाबर के पास मिलने के बहाने बुलाया।वहीं दो कारों में मौजूद सुजीत और बाकी आरोपी पहले से घात लगाए बैठे थे।कबीर को पकड़कर जबरन कार में बैठाया गया और सुदौली मोड़ होते हुए लालगंज–डलमऊ की ओर ले जाया गया।कार के अंदर ही हाथ-पैर पकड़कर उसका गला दबाकर हत्या कर दी गई।बाद में आरोपी उन्नाव के एक सुनसान इलाके में शव फेंककर उस पर पेट्रोल डालकर जला आए ताकि पहचान मिट सके।
डेढ़ लाख में तय ‘मौत का सौदा’, मगर दिलीप को मिले केवल 20 हजार
दिलीप के अनुसार, सुजीत ने हत्या के बदले डेढ़ लाख रुपये देने का वादा किया था।उसने कहा कि “कबीर के परिवार में कोई ताकतवर नहीं है, मामला दब जाएगा।” लेकिन वारदात के बाद दिलीप को केवल 20 हजार रुपये देकर टरका दिया गया।पुलिस ने आरोपी दिलीप को जेल भेज दिया है और केस की अगली कार्रवाई तेज कर दी गई है।