बेटा-बेटी के भेदभाव को दी मात, पोती के जन्म पर मनाया उत्सव

लखनऊ। जहां आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटियों के जन्म को लेकर संकीर्ण सोच देखने को मिलती है, वहीं राजधानी लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र स्थित कल्ली कस्बे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है। यहां एक परिवार ने अपनी नवजात पोती के जन्म को उत्सव की तरह मनाकर बेटियों के प्रति सम्मान और समानता का संदेश दिया है।

कल्ली कस्बा निवासी सुशील मिश्रा और उनकी पत्नी किरण मिश्रा के घर पोती के जन्म के बाद खुशियों का माहौल है। अस्पताल से बहू रेखा मिश्रा जब अपनी नवजात बेटी को लेकर पहली बार घर पहुंचीं, तो परिवार ने उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की थीं। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजा हुआ था।

फूलों की वर्षा के बीच हुआ गृह प्रवेश

बहू और नवजात बेटी के घर पहुंचते ही सोहर और मंगल गीतों की स्वर लहरियां गूंज उठीं। परिवार के लोगों ने फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया। दादी किरण मिश्रा ने बहू और पोती की आरती उतारकर उन्हें घर की लक्ष्मी बताया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पलक-पावड़े बिछाकर गृह प्रवेश कराया। इस दौरान मौजूद परिजनों की खुशी देखते ही बन रही थी।

सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना

इस भावुक और प्रेरणादायक स्वागत समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो देखने वाले लोग परिवार की सोच और पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बेटियों को सम्मान देने और उन्हें परिवार का अभिन्न हिस्सा मानने की ऐसी सोच ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

“पोती के रूप में घर आई है लक्ष्मी”

दादा-दादी सुशील और किरण मिश्रा का कहना है कि उनके घर पोती के रूप में साक्षात लक्ष्मी का आगमन हुआ है। उन्होंने कहा कि बहू और बेटी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। परिवार को जो सबसे बड़ी खुशी मिली है, उसका सम्मान भी उसी तरह होना चाहिए। उनका मानना है कि समाज को बेटा-बेटी के भेदभाव से ऊपर उठकर समानता की सोच अपनानी चाहिए।

समाज के लिए प्रेरणा बना परिवार

कल्ली का यह परिवार उन लोगों के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर उभरा है, जो आज भी बेटा और बेटी में फर्क करते हैं। पोती के जन्म पर मनाया गया यह उत्सव केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक सोच का प्रतीक भी है। यह पहल बताती है कि जब बेटियों के आगमन पर घरों में खुशियां मनाई जाएंगी, तभी एक बेहतर और समानता वाला समाज तैयार होगा।