लखनऊ। सड़क हादसों, अचानक हार्ट अटैक और अन्य मेडिकल आपात स्थितियों में गोल्डन ऑवर के महत्व को ध्यान में रखते हुए लखनऊ पुलिस को अब जीवन रक्षक भूमिका के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ द्वारा पुलिसकर्मियों के लिए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एवं BLS (बेसिक लाइफ सपोर्ट) प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें 50 पुलिसकर्मियों को जीवन बचाने की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
मेदांता हॉस्पिटल के नर्सिंग ब्लॉक की छठी मंजिल पर आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को ऑन-ड्यूटी मेडिकल इमरजेंसी के दौरान फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में सक्षम बनाना था। यह कार्यशाला लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट और मेदांता हॉस्पिटल के बीच पुलिस आयुक्त, लखनऊ के मार्गदर्शन में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आयोजित की गई।

प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए मेदांता हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉ. रोहित कपूर ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के मामलों में शुरुआती 3 से 5 मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान सही तरीके से CPR दिया जाए, तो मरीज के जीवित रहने की संभावना दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से पुलिसकर्मियों को CPR, AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) के प्रयोग, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के लक्षणों की पहचान का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच भी की गई, जिसमें रक्तचाप, नाड़ी एवं ऑक्सीजन स्तर की जांच शामिल रही।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पुलिसकर्मी अक्सर दुर्घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचते हैं। ऐसे में उनका CPR और BLS में प्रशिक्षित होना गोल्डन ऑवर का सदुपयोग सुनिश्चित करेगा। यह पहल लखनऊ पुलिस को एक मल्टी-स्किल्ड फोर्स बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मेदांता हॉस्पिटल द्वारा लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के सभी 54 थानों के पुलिसकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही भविष्य में रिफ्रेशर कोर्स, डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल एवं प्रशिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पुलिसकर्मी नियमित रूप से अपने कौशल को अपडेट कर सकें।
