भूकंप और युद्ध जैसी आपदाओं में कैसे होता है रेस्क्यू? NDRF ने AMC ट्रेनी ऑफिसर्स के सामने किया लाइव प्रदर्शन

लखनऊ। भूकंप, युद्ध या बड़े हादसों के दौरान फंसे लोगों की जान कैसे बचाई जाती है, इसका जीवंत और व्यावहारिक प्रदर्शन शुक्रवार को लखनऊ कैंट स्थित AMC सेंटर एंड कॉलेज के परेड ग्राउंड में देखने को मिला। यहां NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीम ने आर्मी के ट्रेनी और रेगुलर ऑफिसर्स के सामने मल्टी कैजुअलिटी इंसीडेंट (MCI) और भूकंप या धमाकों से गिरी इमारतों में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन का विस्तृत डिमॉन्स्ट्रेशन किया।

एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के कुशल निर्देशन में 11वीं बटालियन NDRF, क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र लखनऊ की टीम ने यह प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल सिविंदर सिंह, AVSM, कमांडेंट AMC सेंटर एंड कॉलेज रहे, जबकि अध्यक्षता मेजर जनरल वी.के. पत्र, कमांडेंट एवं चीफ इंस्ट्रक्टर, ऑफिसर ट्रेनिंग कॉलेज AMC ने की। इस दौरान करीब 250 ट्रेनी ऑफिसर्स और 150 रेगुलर ऑफिसर्स मौजूद रहे।

पहले चरण में दिखाया गया MCI रेस्क्यू

NDRF टीम ने पहले चरण में यह बताया कि किसी बड़े हादसे में जब एक साथ कई लोग घायल होते हैं, तो मल्टी कैजुअलिटी इंसीडेंट (MCI) के दौरान किस तरह त्वरित रिस्पॉन्स दिया जाता है। जवानों ने घायलों की ट्रायेज प्रक्रिया, प्राथमिक उपचार और उन्हें सुरक्षित तरीके से एडवांस ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल भेजने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।

दूसरे चरण में ढही इमारत से रेस्क्यू

दूसरे चरण में टीम ने भूकंप या युद्ध जैसे हालात में ढही या क्षतिग्रस्त बहुमंजिला इमारतों में फंसे लोगों को खोजने और बाहर निकालने की तकनीक दिखाई। इसमें लाइन सर्च, हैलिंग मेथड, टेक्निकल सर्च और कैनाइन (डॉग स्क्वॉड) मेथड का प्रयोग कर पीड़ितों का पता लगाया गया। इसके बाद अत्याधुनिक कटिंग और रेस्क्यू उपकरणों से सुरक्षित रास्ता बनाकर लोगों को बाहर निकालने का अभ्यास किया गया।

40 सदस्यीय टीम ने संभाली कमान

इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व 11 NDRF लखनऊ के प्रभारी उप कमांडेंट अनिल कुमार पाल ने किया। टीम में 5 अधिकारी और 34 प्रशिक्षित रेस्क्यूअर शामिल रहे। साथ ही SDRF का स्वान दस्ता (डॉग स्क्वॉड) भी मौजूद रहा, जिसने मलबे में दबे लोगों को खोजने में अहम भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के अंत में आर्मी अधिकारियों ने NDRF के प्रशिक्षण, अनुशासन और त्वरित रेस्क्यू क्षमताओं की सराहना करते हुए इसे बेहद उपयोगी बताया।