अवध महोत्सव में शनिवार की रात यादगार—स्टेज पर उतरे सदाबहार नगमे, मैदान में मस्ती की बौछार

लखनऊ, संवाददाता।

प्रगति इवेंट द्वारा आयोजित लक्ष्मणपुर अवध महोत्सव 2025 में शनिवार को वीकेंड का खास उत्साह देखने को मिला। परिवार संग पहुंचे लोगों ने झूलों पर मस्ती की, वहीं फूड स्टॉल पर चाऊमीन, बर्गर, टिक्की, दोसा, बाटी–चोखा और लालस के नॉनवेज व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया। हर आयु वर्ग के लोग महोत्सव में उल्लास के साथ शामिल हुए।

 

सुरताल संगम के कलाकारों ने बिखेरे सुर–लय के रंग

महोत्सव के प्रगतिवाद संस्कृति मंच पर रविवार का शाम सुरों की महफ़िल से सजी। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सांस्कृतिक संस्था सुरताल संगम की डायरेक्टर श्रीमती जया श्रीवास्तव के नेतृत्व में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सदाबहार गीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।

हेमंत खंडेलवाल ने ‘बेकरार करके’, डॉ. राका सिन्हा ने ‘जिंदगी प्यार का गीत है’, माया तनु ने ‘जब–जब बाहर आए’, सुशील सिंह राठौड़ ने ‘तुझे सूरज कहूं’ एवं ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ जैसे गीतों से तालियां बटोरीं

प्रकाश खन्ना ने ‘सुन सुन ओ गुलाबी कली’ और ‘तैयब अली’, किरण सोनी ने ‘बता दूं क्या लाना’ तथा ‘कंकरिया मार के’, आध्या सिंह ने ‘ताल मिले’, सुनीता सिंह ने ‘आजकल पांव जमीन पर’, युविका पांडे ने ‘दमा दम मस्त कलंदर’ तथा ‘लव यू जिंदगी’, हिमांशु वर्मा ने ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘कौन दिशा में लेकर चले’, शिवानी कनौजिया ने ‘रोज–रोज’ तथा सीमा सुरक्षा ने ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ गीत गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

राजेंद्र नाथ ने ‘गुलाबी आंखें जो तेरी देखी’ और ‘पल–पल दिल के पास’ प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. जय श्रीवास्तव ने ‘अफसाना लिख रहा हूं’ और ‘दिल में हो तुम’ जैसे सदाबहार गीतों से समां बांध दिया।

 

कार्यक्रम की यादगार प्रस्तुतियों ने दर्शकों के मन में एक अनूठी छाप छोड़ी, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। अंत में संस्था के उपाध्यक्ष एन.बी. सिंह ने सभी कलाकारों को मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।