पूर्व कैबिनेट मंत्री अभिषेक मिश्रा ने युवाओं से रोजगार सृजनकर्ता और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता बनने का किया आह्वान
लखनऊ। लखनऊ। पढ़ाई के दौरान हासिल की गई डिग्री क्या रोजगार के लिए पर्याप्त है या बदलते दौर में युवाओं को नए कौशल सीखने पर भी ध्यान देना होगा? इसी सवाल के इर्द-गिर्द बुधवार को सुल्तानपुर रोड स्थित स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एसएमएस), लखनऊ में आयोजित छात्र संसद में चर्चा हुई। ‘एसएमएस संसद 2026’ में 30 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया और डिग्री, कौशल तथा भारत के कार्यबल के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।
संसदीय प्रारूप में हुई चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने तर्कों के साथ अपनी बात रखी और प्रश्नकाल में भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. अभिषेक मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि डिग्री से ज्ञान की बुनियाद तैयार होती है, लेकिन रोजगार के लिए व्यावहारिक कौशल, आलोचनात्मक सोच और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार करना भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से नौकरी तलाशने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ने का आह्वान किया।

एसएमएस के सीईओ एवं सचिव शरद सिंह ने कहा कि छात्र संसद विद्यार्थियों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने और शासन व्यवस्था को समझने का अवसर देती है। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) आशीष भटनागर ने शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए कौशल आधारित शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया।
प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को ट्रॉफी, प्रमाण-पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. सुमन कुंडी और डॉ. स्मिता त्रिपाठी ने किया। इस दौरान संस्थान के शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।