सजा पूरी, लेकिन जेब खाली… 12 हजार रुपये ने खोल दिए जेल के दरवाजे, तीन बंदियों को मिली नई जिंदगी

लखनऊ। कई बार आजादी की कीमत सिर्फ कानून नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी भी तय करती है। जिला कारागार लखनऊ (गोसाईगंज) में सजा पूरी कर चुके तीन बंदी केवल अर्थदंड जमा न कर पाने के कारण जेल में ही बंद थे। गुरुवार को ‘ऑल इंडिया पयाम-ए-इंसानियत फोरम’ ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए तीनों का  12 हजार रुपये का जुर्माना जमा कराया, जिसके बाद उन्हें सम्मानपूर्वक रिहा कर दिया गया। इस नेक पहल में दारुल उलूम नदवतुल उलेमा (नदवा) के छात्रों ने भी अहम भूमिका निभाई।

कारागार प्रशासन के अनुसार, रिहा किए गए बंदियों में संतोष कुमार (23) के 2 हजार रुपये, मोहम्मद फैसल (24) के 5 हजार रुपये और मोफिजउद्दीन (32) के 5 हजार रुपये का अर्थदंड फोरम की ओर से जमा किया गया। तीनों अपनी न्यायिक सजा पूरी कर चुके थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण जेल से बाहर नहीं निकल पा रहे थे।

इस मानवीय अभियान को सफल बनाने में नदवा के छात्र नौशाद खान नदवी और अबुल हसन ने रिहाई की कानूनी और सामाजिक प्रक्रियाओं में सक्रिय सहयोग किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ अधीक्षक जिला कारागार आर.के. जायसवाल, जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी, सुनील दत्त मिश्रा और डिप्टी जेलर वीरेंद्र विक्रम सिंह मौजूद रहे। जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी ने फोरम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लगातार जरूरतमंद बंदियों की मदद कर समाज को सकारात्मक संदेश दे रही है।

फोरम के जिला समन्वयक शफीक चौधरी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य इंसानों को इंसानों से और दिलों को दिलों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के जीवन की नई शुरुआत में बाधा नहीं बनना चाहिए। जेल से रिहा हुए तीनों बंदियों ने फोरम, नदवा के छात्रों और जेल प्रशासन का आभार व्यक्त किया।